विज्ञापन

पिता घर का भगवान होता है

Dinesh Yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पिता घर के मंदिर का भगवान होता है
        
                                                    
                            
बच्चों के लिए सारा जहान होता है

घर-संसार का ज़मीं और आसमान होता है
परिवार का रोटी कपड़ा और मकान होता है

घर की हर जरूरत का सामान होता है
बच्चों के दिल का अरमान होता है

पिता कोई बहता हुआ दरिया नहीं
वह तो शान्त सागर सा महान होता है

पिता कोई कर्ण प्रिय मधुर संगीत नहीं
वह तो बस महसूस करने वाला गान होता है

बच्चों के भरण पोषण के लिए पिता खाली
पेट काम पर निकलने वाला इंसान होता है।

कभी हल बैलों संग खेत में पसीना बहाता
किसान
कभी शहरों की सड़कों पर रिक्शा चलाता
रिक्शावान होता है।

घर का अनुशासन, प्रशासन व संविधान होता है
इसलिए पिता के त्याग व समर्पण का गुणगान
होता है।

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
8 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all