पिता घर के मंदिर का भगवान होता है
बच्चों के लिए सारा जहान होता है
घर-संसार का ज़मीं और आसमान होता है
परिवार का रोटी कपड़ा और मकान होता है
घर की हर जरूरत का सामान होता है
बच्चों के दिल का अरमान होता है
पिता कोई बहता हुआ दरिया नहीं
वह तो शान्त सागर सा महान होता है
पिता कोई कर्ण प्रिय मधुर संगीत नहीं
वह तो बस महसूस करने वाला गान होता है
बच्चों के भरण पोषण के लिए पिता खाली
पेट काम पर निकलने वाला इंसान होता है।
कभी हल बैलों संग खेत में पसीना बहाता
किसान
कभी शहरों की सड़कों पर रिक्शा चलाता
रिक्शावान होता है।
घर का अनुशासन, प्रशासन व संविधान होता है
इसलिए पिता के त्याग व समर्पण का गुणगान
होता है।
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