खिला कमल कहीं साइकिल दौड़ी
कमर हार ने यहाँ बहुतों की तोड़ी.
डूबी नैया जिसकी पहुँच किनारे
बैठी घाट किनारे उस की घोड़ी.
-दिनेश चौहान