विज्ञापन

खिला कमल कहीं साइकिल दौड़ी

dinesh chauhan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            खिला कमल कहीं साइकिल दौड़ी
        
                                                    
                            
कमर हार ने यहाँ बहुतों की तोड़ी.
डूबी नैया जिसकी पहुँच किनारे
बैठी घाट किनारे उस की घोड़ी.
-दिनेश चौहान
एक दिन पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all