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हर याद जंगल से गुजरती रही

dinesh chauhan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जुल्फों के साये में उनके शाम जब जब ढलती रहीं
        
                                                    
                            
हरेक रात रंगीनियों के गुल सुबह तक खिलाती रही
दिन का उजाला मुँह चिढ़ाता दिखा किरणों के संग
हर याद लम्हों के बियाबान जंगल से गुजरती रही.
-दिनेश चौहान
6 घंटे पहले
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