सावन बीत गया सारा गीले मोजे सूख गये
लौटी चेहरे पर रौनक बस्ते जूते सूख गये.
पानी नदियों का उतरा बच्चे सब स्कूल गये
कीचड़ दलदल माटी दरवाजे भी सूख गये.
-दिनेश चौहान