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बीते लम्हो की नासियत

Diksha kumre

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कहा जाता है -
        
                                                    
                            
जो बीत गई सो बात गई
पर हर बात आपने पीछे छाप छोड़ जाती है
हर कड़वी याद, तजुर्बा बन
जीने की एक नई राह मोड देती है
आने वाले कल को और भी हसीन बनाती है,
उम्मीदों की तूलिका में फिर
नए रंगों से सजाती है।
जो छूट गया सो छूट गया,
उस बीते कल का मलाल न कर,
जो उड़ चुका हवाओं में,
उस गुबार पर सवाल न कर।
मुस्कुरा कर बढ़ जा आगे तू,
आज की इस नई भोर में,
ख्वाबों की डोर को और मजबूत कर।
एक घंटा पहले
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