आंखों पर चश्मा चेहरे पर झुर्रियां |
लिया जीवन का अनुभव ||
कितने किस्से कितनी कहानियां ।
इस उम्र में मेरी समाय |
भूल जाता हूं अब ।
पर बीते लम्हें कहां भूलते हैं||
खट्टे मीठे अनुभवों का जीवन ।
क्या जवानी क्या बुढ़ापा ||
कर्म के बंधन हैं
पूरे होंगे आखिरी में ||
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