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                            आंखों पर चश्मा चेहरे पर झुर्रियां |
                                                                 
                            
लिया जीवन का अनुभव ||

कितने किस्से कितनी कहानियां ।
इस उम्र में मेरी समाय |

भूल जाता हूं अब ।
पर बीते लम्हें कहां भूलते हैं||

खट्टे मीठे अनुभवों का जीवन ।
क्या जवानी क्या बुढ़ापा ||

कर्म के बंधन हैं
पूरे होंगे आखिरी में ||


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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6 वर्ष पहले

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