तेरी कहानी का माना मैं कोई किरदार नहीं,
पर ये नही कि मैं अच्छा कलाकार नहीं
हां ये सच है कि मैंने तुझे माफ़ कर दिया,
पर ये नही कि तू अब गुनहगार नहीं
मैं कोई ग़ज़ल लिखूं और तेरा जिक्र ना हो
ऐसे तो लिखे मैंने कोई अशआर नहीं
उसकी हिज़रत मे उडी है मेरे चेहरे की रंगत,
मै गम में हूं कोई बीमार नहीं
तू जा रहा है तो जा मेरे अश्क़ ना देख,
इन आसुओं पे तेरा अब कोई अधिकार नहीं
हम जंग भी लड़े और शहीद भी हुए
पर लड़ने वालों में मेरा नाम तक शुमार नहीं
किससे तू रखेगा यहाँ वफ़ा की उम्मीद,
धीरज इस शहर में तो कोई दिलदार नहीं!
Dheeraj yadav(unnao)u.p.
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