कभी-कभी मन यूँ ही उदास होता है,
बिना वजह, बिना बात के पास होता है।
न भीड़ समझती है, न शाम समझती है,
इसे तो बस एक चुप सी आस समझती है।
मैंने समेटे हैं कई अधूरे ख्वाब,
कुछ हँसी में लिपटे, कुछ आँसुओं के जवाब।
फिर भी देखो, दिल हारता नहीं है,
अँधेरे में भी दिया जलना भूलता नहीं है।
जो टूट गया, उसे जाने दो,
जो बाकी है, उसे थामे रहो।