विज्ञापन

अभी भी वक़्त है

Dev Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अभी भी वक्त है
        
                                                    
                            

मत पूछो देश कब बदलेगा,
पूछो मैं कब बदलूँगा,
एक दीया जलाने से ही तो
अँधेरा डर कर भागेगा।

जात-पात के नाम पर हमने
कितने बंधन बाँध लिए,
एक ही मिट्टी के हैं हम सब
ये क्यों हम भूल गए?

बेटी को बोझ जो कहते हैं,
उनसे इतना कह दो,
बेटी नहीं पढ़ेगी तो
कल का सूरज कौन गढ़ेगा?

हाथ में किताब दो उस बच्चे को
जिसके हाथ में कचरा है,
शिक्षा ही वो पूँजी है
जो गरीबी से लड़ा है।

नशे में डूबा है जो भाई,
उसे बुरा मत कहो,
गिर गया है, उठा लो उसे,
सहारा बनो, राह दिखा दो।

कचरा सड़क पर नहीं,
सोच में भरा है,
देश गंदा नहीं होता,
मन गंदा होता है।

उठो, ये तुम्हारा ही देश है,
कोई और नहीं आएगा,
तुम एक कदम बढ़ाओ तो
पूरा कारवां बन जाएगा।
-देव कुमार पटेल
5 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anurag vishwkarma (aiyaar)

8 कविताएं

View Profile

UMAKANT SHARMA

281 कविताएं

View Profile