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कागज़ की कश्ती

Deepti Tripathi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बचपन की मौज-मस्ती ,
        
                                                    
                            
वो कागज़ की कश्ती ।
सावन की घटा चढ़ी
और बारिश ख़ूब बरसी।

मां,"आज फिर बना दो
कागज़ की कश्ती"।
मैं बनूंगी कप्तान
सैर करेंगे मेंढक और चींटी।

मां ने बनाई है,
कागज़ की कश्ती।
बचपन की यादों में
फिर लौट आई मस्ती।।

-दीप्ति त्रिपाठी
2 दिन पहले
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