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आशिकी है

DEEPAK KAUSHIK

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आशिकी है इनायत है,
        
                                                    
                            
बेवफा है शिकायत है,
हूं बेचैन मैं इतना,
मुझे आपकी आदत है।
कलम से उकेरू जज्बाते,
हवाओं में तब आहटें,
पीर समेटे समन्दर बना,
प्रणय की वो छटपटाहटे।
तेरे नयन का याराना,
बन गया एक अफसाना,
फूल नहीं आया बेगाना,
भौंरा बन पहरों गुनगुनाया।
- कौशिक अलबेला
9 महीने पहले
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