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आशिकी है

                
                                                         
                            आशिकी है इनायत है,
                                                                 
                            
बेवफा है शिकायत है,
हूं बेचैन मैं इतना,
मुझे आपकी आदत है।
कलम से उकेरू जज्बाते,
हवाओं में तब आहटें,
पीर समेटे समन्दर बना,
प्रणय की वो छटपटाहटे।
तेरे नयन का याराना,
बन गया एक अफसाना,
फूल नहीं आया बेगाना,
भौंरा बन पहरों गुनगुनाया।
- कौशिक अलबेला
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9 महीने पहले

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