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नेताजी

Deepak Dixit

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            
हमने अपने फुटबॉल क्लब के फ़ाइनल मैच में
स्थानीय नेताजी को मिन्नत कर के बुलवाया
उन्हें समारोह का मुख्य अतिथि बनाया और
पुरे डेढ़ घंटे का मैच भी दिखलाया

खेल ख़त्म होने के बाद
हमने उन्हें माइक पकड़ाया
पर वहां भीड़ को देख कर
वो जा कह गए
उससे हमारा सर चकराया

उन्होंने कहा,'मुझे बताया गया की इस
प्रतियोगिता में बहुत सी टीम खेलने आईं है.
पर मेरा दिल व्यतिथ है ये देख
कर कि सिर्फ दो ही टीम फ़ाइनल में पहुँच पाईं है.

मैं कल ही खेल मंत्री से मिलूंगा
और ऐसी व्यवस्था कर दूंगा
कि ज्यादा से ज्यादा टीम फ़ाइनल खेल पाएं
दलितों और वंचितों की की
कोई भी टीम इससे वंचित न रह पाएं

उससे भी ज्यादा तकलीफ मुझे यह देख कर हुयी
कि बाइस खिलाडियों के बीच एक ही थी मुई

ये देख कर मेरा मन भीतर ही भीतर सड़ रहा है कि
इतने सारे लोगों को एक ही
फुटबाल से काम चलना पड़ रहा है.

मंत्री जी से कह कर ऐसी व्यवस्था कराऊंगा
कि अगली बार जब मैं यहाँ आऊंगा
तो हर एक खिलाड़ी को अपनी अपनी
फुटबाल से खेलता पाऊंगा

मैं तो आपका सेवक हूँ
क्या अपने लोगों के लिए
इतना भी न कर पाऊंगा?’

दीपक दीक्षित


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6 वर्ष पहले
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