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नेताजी

                
                                                         
                            
हमने अपने फुटबॉल क्लब के फ़ाइनल मैच में
स्थानीय नेताजी को मिन्नत कर के बुलवाया
उन्हें समारोह का मुख्य अतिथि बनाया और
पुरे डेढ़ घंटे का मैच भी दिखलाया

खेल ख़त्म होने के बाद
हमने उन्हें माइक पकड़ाया
पर वहां भीड़ को देख कर
वो जा कह गए
उससे हमारा सर चकराया

उन्होंने कहा,'मुझे बताया गया की इस
प्रतियोगिता में बहुत सी टीम खेलने आईं है.
पर मेरा दिल व्यतिथ है ये देख
कर कि सिर्फ दो ही टीम फ़ाइनल में पहुँच पाईं है.

मैं कल ही खेल मंत्री से मिलूंगा
और ऐसी व्यवस्था कर दूंगा
कि ज्यादा से ज्यादा टीम फ़ाइनल खेल पाएं
दलितों और वंचितों की की
कोई भी टीम इससे वंचित न रह पाएं

उससे भी ज्यादा तकलीफ मुझे यह देख कर हुयी
कि बाइस खिलाडियों के बीच एक ही थी मुई

ये देख कर मेरा मन भीतर ही भीतर सड़ रहा है कि
इतने सारे लोगों को एक ही
फुटबाल से काम चलना पड़ रहा है.

मंत्री जी से कह कर ऐसी व्यवस्था कराऊंगा
कि अगली बार जब मैं यहाँ आऊंगा
तो हर एक खिलाड़ी को अपनी अपनी
फुटबाल से खेलता पाऊंगा

मैं तो आपका सेवक हूँ
क्या अपने लोगों के लिए
इतना भी न कर पाऊंगा?’

दीपक दीक्षित


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6 वर्ष पहले

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