माँ की ममता, मन की भाषा,
हिंदी मेरी शान है।
इसकी मीठी धुन में बसता,
मेरा हिंदुस्तान है।।
माटी की खुशबू है इसमें,
गंगा-यमुना धार।
तुलसी, कबीर, रहीम की वाणी,
इसका अनुपम श्रृंगार।।
हिंदी केवल शब्द नहीं है,
यह भावों का संसार।
इसके अक्षर-अक्षर में है,
संस्कृति का विस्तार।।
गाँव-गली से नगर-नगर तक,
इसकी गूँजे तान।
जन-जन के हृदयों में बसती,
हिंदी की पहचान।।
विज्ञान, तकनीक और शिक्षा में,
हिंदी आगे आए।
विश्व-पटल पर अपनी भाषा,
नव-परचम लहराए।।
निज भाषा का मान बढ़ाएँ,
निज भाषा का ज्ञान।
हिंदी के सम्मान से बढ़ता,
भारत का सम्मान।।
आओ मिलकर प्रण यह लें,
हिंदी का गौरव बढ़ाएँ।
घर-घर हिंदी, मन-मन हिंदी,
जन-जन तक पहुँचाएँ।।
बोले आज ‘महादेव’ मिलकर,
हिंदी है सम्मान।
हिंदी से जग में गूँजे,
भारत का जयगान।।