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थम गया सा फिर आज एक तूफान है

Chetna Karnatak

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            शब्द तो बहुत समझ लिए मेरे
        
                                                    
                            
अब खामोशी समझ कर दिखाओ तो जाने
शोर तो बहुत था इस मन में
पर थम गया सा फिर आज एक तूफान है

हर ओर से लोग बुला रहे मुझे
यह चकाचौंध देखकर मन भी हैरान है
पर एक कदम भी बढ़ाने से डरती हूँ मैं
हरियाली सा दिखने वाला वो एक श्मशान है

हँस लूँगी फिर एक बार, पार करके यह श्मशान
क्योंकि दिल में मेरे आज भी एक बचपना गुमनाम है
शोर तो बहुत था इस मन में
पर थम गया सा फिर आज एक तूफान है

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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7 वर्ष पहले
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Ankit Kumar

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