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बेटी की इज्जत से बड़ा पैसा हो गया!

Brigadier Usmanude

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बेटी की इज्जत से बड़ा पैसा हो गया!
        
                                                    
                            

कैसा रहनुमा, पैसा हो गया,
एक इज्जत बेच रहा,
एक इज्जत खरीद रहा,
इसके बीच का भी सौदा पैसा हो गया।

मजलूम के घर की बेटी,
अमीरों के घर की दासी बने,
क्या बेटियों की इज्जत से
बड़ा भी पैसा हो गया?

ये कैसी मेरे देश की विडंबना है,
जिस देश में बेटी को देवी कहा जाए,
उसी मेरे महान भारत में
देवी को इंसाफ़ न दिया जाए।

जब गुनहगारों का राज्याभिषेक किया जाए,
नारी को इंसाफ़ न दिया जाए,
उम्मीद बेटियों को क्या होगी?
ये डर की दहशत उनके हृदय में
हर रोज़ बैठती होगी।

अगर देश को महान बनाना है,
तो बेटी का सम्मान करो,
अपराधी चाहे कोई भी हो,
धड़ को सर से अलग करो।

 
10 घंटे पहले
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