आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

बेटी की इज्जत से बड़ा पैसा हो गया!

                
                                                         
                            बेटी की इज्जत से बड़ा पैसा हो गया!
                                                                 
                            

कैसा रहनुमा, पैसा हो गया,
एक इज्जत बेच रहा,
एक इज्जत खरीद रहा,
इसके बीच का भी सौदा पैसा हो गया।

मजलूम के घर की बेटी,
अमीरों के घर की दासी बने,
क्या बेटियों की इज्जत से
बड़ा भी पैसा हो गया?

ये कैसी मेरे देश की विडंबना है,
जिस देश में बेटी को देवी कहा जाए,
उसी मेरे महान भारत में
देवी को इंसाफ़ न दिया जाए।

जब गुनहगारों का राज्याभिषेक किया जाए,
नारी को इंसाफ़ न दिया जाए,
उम्मीद बेटियों को क्या होगी?
ये डर की दहशत उनके हृदय में
हर रोज़ बैठती होगी।

अगर देश को महान बनाना है,
तो बेटी का सम्मान करो,
अपराधी चाहे कोई भी हो,
धड़ को सर से अलग करो।

 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
9 hours ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर