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शहर उजड़ा हुआ बस जायेगा इक दिन

BRAJESH KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            शहर उजड़ा हुआ बस जायेगा इक दिन
        
                                                    
                            
है जो यह अंधेरा छट जायेगा इक दिन
दिल अगर टूटा आबाद फिर नहीं होता
देखते ही देखते मिट जायेगा इक दिन
अपने कदमों को कभी
पीछे ना लाने देना
रहगुज़र कैसा भी हो
कट जायेगा इक दिन
अपनी खुशियों में औरों को शामिल कर लो
तेरा हर ग़म जो होगा बट जायेगा इक दिन
सब कुछ समेटने में ज़िन्दगी ज़ाया न करो
जो मिला है योंही सिमट जायेगा इक दिन
सफ़र कितना भी लंबा क्यों न हो जाये "वफ़ा"
हौसले कायम हैं अपनी मंजिल जायेगा इक दिन
5 घंटे पहले
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