शहर उजड़ा हुआ बस जायेगा इक दिन
है जो यह अंधेरा छट जायेगा इक दिन
दिल अगर टूटा आबाद फिर नहीं होता
देखते ही देखते मिट जायेगा इक दिन
अपने कदमों को कभी
पीछे ना लाने देना
रहगुज़र कैसा भी हो
कट जायेगा इक दिन
अपनी खुशियों में औरों को शामिल कर लो
तेरा हर ग़म जो होगा बट जायेगा इक दिन
सब कुछ समेटने में ज़िन्दगी ज़ाया न करो
जो मिला है योंही सिमट जायेगा इक दिन
सफ़र कितना भी लंबा क्यों न हो जाये "वफ़ा"
हौसले कायम हैं अपनी मंजिल जायेगा इक दिन
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