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भूलने का गम भूलना

Bhupendra Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अब तेरा चेहरा आँखों में नहीं, दिल में भटकता है
        
                                                    
                            
नाम लवों पे होता है और खून आँखों से टपकता है
वो तेरी बातें नशे सी चढ़ती थी दिमाग में
आज तेरे खोने का गम, जहन से नहीं उतरता है

तेरे गम में इस कदर खोया की जीना ही भूल गया
प्यार से उस नफ़रत को पीना ही भूल गया
आफत क्या थी और इसका क्या सौदा ?
तेरी ख्वाहिश के चलते मैं भूलना ही भूल गया

ये मेरी गर्मजोशी, आँखों से इस तरह झलकी है
निगाहें हर तरफ घुमी, तब तुझपे अटकी हैं।
ताक पर रखके घूरता था, मैं अपने कर्मो को
तभी तो जिंदगी इस मुकाम पर आके लटकी है।l

उस शख्स को आज भी ढूंढ़ता हूँ
जिसने महखाने से दोस्ती करवाईl
अकेले अकेले जीने का डंग नहीं था
अब साथ जीते हैं मैं और मेरी तन्हाईll


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6 वर्ष पहले
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