गीत गाना चाहता हूँ, मगर ग़ज़ल निकलता है,
तुझे देखकर मेरा सुर भटक जाता है।
खूबसूरत इतनी कि लाजवाब हो तुम,
तुझे देखकर हर लफ़्ज़ ठहर जाता है।
तेरी आँखों में जाने कैसी कशिश है,
देखते ही मेरा दिल मचल जाता है।
तेरी माथे की कुमकुम,
पैरों की रुनझुन,
बस दिल खो जाता है सुन-सुन।
क्या कहूँ, हाय दिल की बात,
ग़ज़ल भी साथ नहीं दे रही।
बस निकल रही है एक ही बात—
तुम रहो सदा आबाद।
तेरे अधरों से टपकता नूर,
माथे पर लटकती वो बालों की लट,
कहती है कितना कुछ सच।
मासूम चेहरा तेरा,
क्या कहूँ, बेचैन है मन मेरा।
गीत गाना चाहता हूँ,
मगर ग़ज़ल निकलता है,
तुझे देख मेरा सुर भटक जाता है।
- भुनेश्वर अनंत