आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

गीत गाना चाहता हूं

                
                                                         
                            गीत गाना चाहता हूँ, मगर ग़ज़ल निकलता है,
                                                                 
                            
तुझे देखकर मेरा सुर भटक जाता है।

खूबसूरत इतनी कि लाजवाब हो तुम,
तुझे देखकर हर लफ़्ज़ ठहर जाता है।
तेरी आँखों में जाने कैसी कशिश है,
देखते ही मेरा दिल मचल जाता है।

तेरी माथे की कुमकुम,
पैरों की रुनझुन,
बस दिल खो जाता है सुन-सुन।

क्या कहूँ, हाय दिल की बात,
ग़ज़ल भी साथ नहीं दे रही।
बस निकल रही है एक ही बात—
तुम रहो सदा आबाद।

तेरे अधरों से टपकता नूर,
माथे पर लटकती वो बालों की लट,
कहती है कितना कुछ सच।

मासूम चेहरा तेरा,
क्या कहूँ, बेचैन है मन मेरा।
गीत गाना चाहता हूँ,
मगर ग़ज़ल निकलता है,
तुझे देख मेरा सुर भटक जाता है।
- भुनेश्वर अनंत
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
35 मिनट पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर