विज्ञापन

सीडीएस बिपिन सिंह रावत

Baljeet Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            रावत बिपिन तिरंगे का तू,
        
                                                    
                            
कफ़न ओढ़कर सो गया।
आँखों में आँसू देकर क्यूं,
नील गगन में खो गया।।

उत्तराखण्ड के पौड़ी में,
सन अट्ठावन में जनम लिया।
बनकर प्रथम सीडीएस तूने,
देश का रौशन नाम किया।।

घात लगा बैरी ने जब,
आघात दिया पुलवामा में।
सर्जिकल से करके चढ़ाई,
धाक जमाई दुनियां में
ऐसा काम किया सेना में
सबका प्रिय हो गया।।

आँखों में आसूं देकर तू,
नील गगन में खो गया।।

बावन गढ़ गढ़वाल के हैं
जहां रजपूतों का राज रहा।
आज कौम की गाथा में,
तेरे नाम का नाम डंका बाज रहा।।

वीर शहीदों का फिर से,
इतिहास जब लिक्खा जाएगा।।

रजपूतों की आन बान में,
शिरोमणि कहलाएगा।।
अपनी यादों की माला तू
हर सीने में पिरो गया।।
आँखों में आसूं देकर तू,
नील गगन में खो गया।।

सैनिक हो या सेनानायक,
सबने तुझपे मान किया
देश की सेना को तूने,
गौरवशाली सम्मान दिया।।

अब सेना को डर नहीं लगता,
दुश्मन के हुंकारों से।
सजा दिया सेना को तूने,
आधुनिक हथियारों से।।

तेरी शहादत को सुनकर,
हर हिंदुस्तानी रो गया।।
आंखों में आसूं देकर तू,
नील गगन में खो गया।।

होती रही है होती रहेगी,
वीरों की सदा आरती।
रावत बिपिन पे नाज करेगी,
सदियों तक मां भारती।।

कहे बलजीत विरोधी का भी,
हृदय डगमग डोला है।
जब जब खून राजपूतों का,
देश धर्म पर खौला है।।
खिला रहेगा बाग सदा ये,
बीज तू ऐसे बो गया।।
आंखो में आंसू देकर तू,
नील गगन में खो गया।।

- बलजीत सिंह
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
4 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Parul Bhaktani

1570 कविताएं

View Profile