विज्ञापन

नीले आसमान पर

Bajrang Lal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इस नीले आसमान पर,
        
                                                    
                            
सुनहरी धूप का कैसा जादू!
मेरे सोए हुए मन में,
किसने गुनगुनाया यह मीठा गीत?
दुख की वह घनी काली रात,
सुबह की पहली किरण के साथ बीत गई।
खुल गई आँखें, धुल गए सारे आँसू,
और भीतर एक नई सी जान जाग उठी।
सजी-धजी कलाकार सी कुदरत,
जिसके ज़र्रे-ज़र्रे में धड़कता संगीत।
मेरे दिल के खामोश तारों को छेड़कर,
आज अंदर ही अंदर कौन मुस्कुराया?
लगातार बहने वाली,
वक्त की इस नदी का अजब ही खेल।
एक तरफ मन की कभी न बुझने वाली प्यास,
और दूसरी तरफ यह सुंदर विशाल आसमान।
— बजरंग बीकानेरी
2 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anurag vishwkarma (aiyaar)

8 कविताएं

View Profile

Priya Mehra

1 कविता

View Profile

Md Iftekhar

4 कविताएं

View Profile