प्यास
ओ कुम्हरे तू बना ही देना,
मेरी देह को एक गगरिया।
फूटी हो न रिसे कहीं से,
थ्जसे सावत रखु में सारी उमरिया।
जीवन की अंतिम साँसों तक अमृत भर लूँ
गागरिया को कर दूँ
जैसे मैं पूनम की चांदनिया।
रे जितनी खाली हो,
उतना अंधेरा अंतरमन में
ज्योति जलाकर,
पीव फेलाये ज्योतनिया।
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