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एक दीप मेरा भी जलायें

Atmaram Yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एक दीप मेरा भी जलायें
        
                                                    
                            
अबकी दीवाली सबकी

हो जाए परिपूर्ण

दूर हो दुःख दर्द,

और जिन्दगी हो पूर्ण

अनुपम जीवन स्नेह भरा,

आप सबको मिल जाए

हर उम्मीद और मंजिले को

मिल जाए सही दिशाएं

हर खुशियां नाचे आंगन में

*पीव* ऐसी दीवाली आये

अपने आंगन में अपनेपन का

एक दीप मेरा भी जलाये

अमावस की रात लगे पूर्णिमा

हिल मिल कर सब दीप जलाये

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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