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कभी दूर जाने की ज़िद...

Ashutosh Amit

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एक हूक सी उठती है,
        
                                                    
                            
दिल ठहर सा जाता है,
जब-जब तेरी याद आती है।
कितने सपने, कितनी यादें,
मन की परतों-परतों पर।
उम्मीद भरी तेरी बातें,
एक नयी दुनिया सजाती हैं,
जब-जब तेरी याद आती है।
तेरा चलना, तेरा मचलना,
तेरा मुस्कुराना, तेरा गुनगुनाना।
तेरा आना, तेरा जाना,
बिस्तर पर पड़ी सलवटें...
सब याद है मुझे।
तेरा रूप, जैसे सर्दी की
सुबह की मीठी धूप।
कभी करीब आने की धुन,
कभी दूर जाने की ज़िद...
सब याद है मुझे।
4 घंटे पहले
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