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ख़्वाबों को

Asha Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ख़्वाबों को हक़ीक़त से ना जोड़िये ज़नाब।
        
                                                    
                            
कभी चांद को दिन में खिलते नहीं देखा।।
5 घंटे पहले
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