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बड़े करीब से

Asha Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बड़े करीब से देखा है कुछ
        
                                                    
                            
हम साये रिश्तों को।
दिल को तोडते है और
भरोसा चाक करते हैं।।
कहां कोई गैर होता है सब
होते हैं अपने हीं।
जो हौले से ज़हर के तीर
जिगर के पार करते हैं।।
चेहरे पर लिए चेहरे बड़े
मासूमियत से वो।
हर लम्हा वफ़ादारी का वो
इज़हार करते हैं।।
किसी का होना भी होने जैसा
लगता नहीं दिल को।
कुछ लोग इस क़दर रिश्तों को
दाग़दार करते हैं।।
2 घंटे पहले
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