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बड़े करीब से

                
                                                         
                            बड़े करीब से देखा है कुछ
                                                                 
                            
हम साये रिश्तों को।
दिल को तोडते है और
भरोसा चाक करते हैं।।
कहां कोई गैर होता है सब
होते हैं अपने हीं।
जो हौले से ज़हर के तीर
जिगर के पार करते हैं।।
चेहरे पर लिए चेहरे बड़े
मासूमियत से वो।
हर लम्हा वफ़ादारी का वो
इज़हार करते हैं।।
किसी का होना भी होने जैसा
लगता नहीं दिल को।
कुछ लोग इस क़दर रिश्तों को
दाग़दार करते हैं।।
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एक घंटा पहले

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