विज्ञापन

दोबारा नहीं मिलेगी

Arvind Agrawal

Mere Alfaz
विज्ञापन
                                    
                                                                        
                            मत बर्बाद कर वक़्त गलत जगहों पर,
        
                                                    
                            
जो चीज़ अंदर है बाहर नहीं मिलेगी II

मत ढूंढ मेरी तस्वीर पुराने कागज़ों में,
दिल के अंदर झांक वहीं पे कहीं मिलेगी II

लौट के न आएगा बीता हुआ लम्हा,
ये पल ये जो घड़ी है दोबारा नहीं मिलेगी II

- अरविन्द कुमार अग्रवाल

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
8 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all