लेखिका : सोनाली डेरनियागाला
प्रकाशक : अल्फ्रेड ए. नॉफ
मूल्य : 6,860 रुपये (हार्डकवर)
एक पल, जिसमें सब कुछ तबाह हो गया
नेपाल की यह त्रासदी 2013 की श्रीलंका सुनामी की भयावह याद दिलाती है। उसमें अपना पूरा परिवार खोने के बाद लेखिका की यह बेस्टसेलर किताब दुख के उस ब्लैक होल से निकलने की प्रेरणा देती है, जिसका कारण ऐसी भयावह प्राकृतिक आपदाएं होती हैं।
यों तो सभी दुखद संस्मरण दर्दनाक होते हैं, पर सोनाली डेरनियागाला की वेव एक ऐसी दर्दनाक कहानी है, जिसकी कल्पना भी डराती है। 26 दिसंबर, 2004 की सुबह, श्रीलंका के दक्षिणी तट पर आई सुनामी में सोनाली ने अपने माता-पिता, पति और दो बेटों को खो दिया, जबकि वह खुद चमत्कारिक रूप से बच गईं।
वेव में वह सुनामी की घटना और उसके बाद के उन वर्षों का जिक्र करती हैं, जब वह श्रीलंका में गहरे दुख में डूबी रहीं और फिर लंदन स्थित अपने घर लौट आईं। उन्होंने अपनी कहानी बेहद सधे हुए, सहज, दिलचस्प और बिना किसी भावुकता के लिखी है। त्रासदी के बाद के शुरुआती महीनों में वह उस सच्चाई से जूझती रहीं, जिसका न तो वह सामना कर पा रही थीं और न ही उससे मुंह मोड़ सकती थीं। फिर आने वाले वर्षों में वह धीरे-धीरे उस खुशहाल जिंदगी की यादों में लौटने लगीं, जिसे वे खो चुकी थीं। इस दौरान उन्होंने एक कठिन संतुलन बनाना सीखा-एक ओर अपने नुकसान की असहनीय पीड़ा और यादें थीं, तो दूसरी ओर अपने खोए हुए परिवार को अपने भीतर जीवित रखने की कोशिश।
उस सुबह, डेरनियागाला और उनके पति, माता-पिता और दो बेटे श्रीलंका के दक्षिण-पूर्वी तट पर स्थित याला नेशनल पार्क में छुट्टी मना रहे थे। डेरानियागाला ने सबसे पहले समुद्र का जलस्तर बढ़ते देखा-यह नजारा अजीब तो था, पर खतरनाक नहीं लग रहा था। धीरे-धीरे उन्हें समझ आया कि असल में क्या हो रहा है। अचानक वह चिल्लाईं। उन्होंने अपने बच्चों को पकड़ा और पति के साथ होटल के पीछे खड़ी जीप की ओर भागीं। वह जीप से निकल ही रही थीं कि तभी लहर ने टक्कर मारी और वह बेहोश हो गईं। जब उन्हें होश आया, तो वह बिल्कुल अकेली थीं। उनके परिवार का कोई अता-पता नहीं था। तभी उन्होंने एक बच्चे को अपनी ओर तैरते हुए देखा-एक लड़का, जो कार की टूटी हुई सीट को पकड़े हुए था। एक पल के लिए उन्हें लगा कि यह उनका बेटा हो सकता है, लेकिन थोड़ी देर बाद उन्हें सच्चाई का एहसास हुआ कि यह उनका बेटा नहीं था।
डेरनियागाला तो बच जाती हैं, लेकिन हर गुजरते पल के साथ उन्हें एहसास होता है कि वह अपने पूरे परिवार में अकेली बची हैं। जब उन्हें कोलंबो में उनकी मौसी के घर ले जाया जाता है, तो वह लगातार इंटरनेट पर खुदकुशी के दर्द-रहित तरीके ढूंढती रहती हैं। महीनों तक, बच्चों से जुड़ी कोई भी चीज (खिलौने, क्रिकेट की गेंद, या छोटे-छोटे कदमों की आहट) उन्हें उस भयानक दुख की याद दिला देती। वह शराब पीने लगीं और उसके साथ अवसादरोधी दवाएं मिलाकर लेने लगीं। वह लिखती हैं, ‘सात साल बीतने के बाद, मेरे नुकसान का एहसास और भी गहरा हो गया है। मेरी कहानी मुझे भी अविश्वसनीय लगती है। एक पल में सबका गायब हो जाना, उस दलदल से मेरा बाहर निकलना-यह सब क्या है, कोई कहानी या मिथक?’
यह दुख ही नहीं, प्यार के बारे में भी एक बहुत ही बेहतरीन किताब है, जो दिल को छू लेती है। दुख वह ‘ब्लैक होल’ है, जो हमारी जिंदगी में तब बनता है, जब हम किसी ऐसे इन्सान को खो देते हैं, जिसकी जगह कोई नहीं ले सकता-जैसे कोई बच्चा, माता-पिता या प्रेमी। वेव प्राकृतिक आपदा की पृष्ठभूमि में एक प्रेम-कहानी भी है और प्यार की अहमियत के बारे में बताती है।
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