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विश्व कविता दिवस पर विदेशी साहित्य से हिंदी में अनूदित 5 कविताएं

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                            आकस्मिक मुलाकात - विस्लावा शिम्बोर्स्का
                                                                 
                            

हम मिले बड़े सलीके और शिष्टाचार के साथ 
हमने कहा- कितनी खुशी हुई आपको इतने सालों बाद देखकर 
पर हमारे भीतर थककर सो गया था बहुत-कुछ 

घास खा रहा था शेर, बाज ने अपनी उड़ान छोड़ दी थी 
मछलियाँ डूब गई थीं और भेड़िए पिंजरों में बन्द थे 
हमारे साँप अपनी केंचुल बदल चुके थे 
मोरों के पंख झड़ गए थे 
उल्लू तक नहीं उड़ते थे हमारी रातों में 
हमारे वाक्य टूट कर ख़ामोश हो गए 

असहाय-सी मुस्कान में खो गई
हमारी इंसानियत
जो नहीं जानती कि आगे क्या कहे  आगे पढ़ें

'जब तुम बूढ़ी हो जाओगी' - विलियम बट्लर येट्स

5 वर्ष पहले

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