खुद्दारी वह नियामत है।
जो किसी के आगे झुकती नहीं।
खुद्दार व्यक्ति की जिंदगी कितनी
भी अभावों में गुजर रही हो।
पर उसे दौलत के तराजू में
नहीं तौला जा सकता।