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दिल को मेरे ऐसे परेशान ना कर

Arun Yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इस तरह आफतो में जान ना कर
        
                                                    
                            
हुस्न पर अपने यूँ गुमान ना कर

मोहब्बत है तो आकर इजहार कर
दिल को मेरे ऐसे परेशान ना कर

आ तेरी चाहत को पलकों पर सजा लूँ
खामखां यूं देख कर हैरान ना कर

इस भरी बरसात में छत पर टहल कर
दिल पर मेरे यूं कोई एहसान ना कर

आग पानी में लगा मुस्कुरा रही हो
इस तरह दिल मेरा नशेमान ना कर

तेरे गेसुओं मेंं कैद हैं सावन-ए-बादल
सब्र के मेरा तू इंतिहान ना कर

आदतें कुछ है खफा तो होने दे
चाल से मैला मेरा ईमान ना कर

मंजिले मिल जाएगी एक दिन 'कुँवर'
ख्वाहिशें को इस तरह वीरान ना कर

-हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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