इस तरह आफतो में जान ना कर
हुस्न पर अपने यूँ गुमान ना कर
मोहब्बत है तो आकर इजहार कर
दिल को मेरे ऐसे परेशान ना कर
आ तेरी चाहत को पलकों पर सजा लूँ
खामखां यूं देख कर हैरान ना कर
इस भरी बरसात में छत पर टहल कर
दिल पर मेरे यूं कोई एहसान ना कर
आग पानी में लगा मुस्कुरा रही हो
इस तरह दिल मेरा नशेमान ना कर
तेरे गेसुओं मेंं कैद हैं सावन-ए-बादल
सब्र के मेरा तू इंतिहान ना कर
आदतें कुछ है खफा तो होने दे
चाल से मैला मेरा ईमान ना कर
मंजिले मिल जाएगी एक दिन 'कुँवर'
ख्वाहिशें को इस तरह वीरान ना कर
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