वो ईश सी तस्वीर तेरी माँ
जीती जागती हक़ीक़त मेरी
प्रेम की सूरत, त्याग की मूरत।
तन मन में प्यार भरा माँ
धैर्य करुणा का सागर
तुम ही नींव धरा की माँ।
खड़ा धरा पे ये जग
जिस ममता की छाँव में
रहता है ये जग
सुख दुःख की धारा में।
हर पीड़ा को सहन किया
सुख आँचल में भर के
हमें फूलों सा उपहार दिया।
जीने का हमें सत्मार्ग बताया
धूप छाँव में तप कर के
भविष्य का सपना पूर्ण कराया।
तुम घर आँगन की माली हो
अपने बगियों की फुलवारी हो
माँ के ऋण से मुक्त नहीं संसार
उसके ही आशीर्वाद से घर संसार।
जला दी अस्थियाँ जिसने
स्वयं को मिटाकर
कर दिया समर्पण उसने
अपनी ही ममता पर।
नील गगन के तरो मे
चमकता है माँ त्याग तुम्हारा
स्वर्ग से भी ऊँचा हैं
स्थान तुम्हारा माँ ॥
-मीरा त्यागी
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