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कब तक है

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Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कब तक है
        
                                                    
                            

पीठ पीछे चुभते खंजर कब तक हैं
आँखों में पानी के मंजर कब तक हैं।

तिरंगे में लिपटे, जवान कब तक हैं
वतन के दुश्मन, हैवान कब तक है।

शहीदों की याद करो कुर्बानियाँ कब तक हैं
बिलखती विधवाओं की जवानियाँ कब तक हैं।


दोस्त के वेश में, यह वैरी कब तक हैं
ईट का जवाब पत्थर में, देने में देरी कब तक हैं।

यह अमन-चैन और आमीन कब तक हैं
हमारे सब्र का इम्तिहान लेता, यह चीन कब तक हैं।

सह्रदय हिंदुस्तान की सभी गलतियों में माफी कब तक हैं
सुन चीन! तेरी गुस्ताखियों में नाइंसाफी कब तक हैं।


डोकलाम की आड़ में, तेरा यह वैर कब तक हैं
सस्ते में ना ले हमें, समझ जा अब तेरी खैर कब तक हैं।

तेरी गर्दन पर लटकती हमारी शमशीर कब तक हैं
ह्रदय को छलनी करने वाले उसके चीर कब तक हैं।

मरने वाले मेरे ही वतन के जाँबाज़ कब तक हैं
सुन ले! अब, व्यूह भेदन की कर्कश आवाज़ तेरी जमीन पर कब तक हैं।

अर्चना कोचर 

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