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कब तक है

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                            कब तक है
        
                                                    
                            

पीठ पीछे चुभते खंजर कब तक हैं
आँखों में पानी के मंजर कब तक हैं।

तिरंगे में लिपटे, जवान कब तक हैं
वतन के दुश्मन, हैवान कब तक है।

शहीदों की याद करो कुर्बानियाँ कब तक हैं
बिलखती विधवाओं की जवानियाँ कब तक हैं।


दोस्त के वेश में, यह वैरी कब तक हैं
ईट का जवाब पत्थर में, देने में देरी कब तक हैं।

यह अमन-चैन और आमीन कब तक हैं
हमारे सब्र का इम्तिहान लेता, यह चीन कब तक हैं।

सह्रदय हिंदुस्तान की सभी गलतियों में माफी कब तक हैं
सुन चीन! तेरी गुस्ताखियों में नाइंसाफी कब तक हैं।


डोकलाम की आड़ में, तेरा यह वैर कब तक हैं
सस्ते में ना ले हमें, समझ जा अब तेरी खैर कब तक हैं।

तेरी गर्दन पर लटकती हमारी शमशीर कब तक हैं
ह्रदय को छलनी करने वाले उसके चीर कब तक हैं।

मरने वाले मेरे ही वतन के जाँबाज़ कब तक हैं
सुन ले! अब, व्यूह भेदन की कर्कश आवाज़ तेरी जमीन पर कब तक हैं।

अर्चना कोचर 

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5 वर्ष पहले
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kamal jha

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