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मजबूरी हो कि मस्ती,कहकहे सुनाये जा

ARAVINDA MOHUN

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मजबूरी हो कि मस्ती,कहकहे सुनाये जा
        
                                                    
                            
तराने ऐसे गा कि ग़म भी तुझ संग गाये जा।।
हैं लोग यहां ऐसे भी,जो आंख चुराते हैं सबसे
खोज उन्हें,उन से भी, आंखें मिलाये जा।।
आंखें मिलेंगी तो बातें बनेंगी कई कई, हुए
क्यों वे मायूस, बातें उन्हें भी समझाये जा।।
तौहीन कर बुजुर्गों की, जो परचम हैं फहराये
उनसे है अपनी दूरी, बातें उन्हें समझाये जा।।
3 घंटे पहले
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Amit Kumar

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