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मजबूरी हो कि मस्ती,कहकहे सुनाये जा

                
                                                         
                            मजबूरी हो कि मस्ती,कहकहे सुनाये जा
                                                                 
                            
तराने ऐसे गा कि ग़म भी तुझ संग गाये जा।।
हैं लोग यहां ऐसे भी,जो आंख चुराते हैं सबसे
खोज उन्हें,उन से भी, आंखें मिलाये जा।।
आंखें मिलेंगी तो बातें बनेंगी कई कई, हुए
क्यों वे मायूस, बातें उन्हें भी समझाये जा।।
तौहीन कर बुजुर्गों की, जो परचम हैं फहराये
उनसे है अपनी दूरी, बातें उन्हें समझाये जा।।
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एक घंटा पहले

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