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जन्मदिन पर मन उदास क्यों है…

ANURADHA TYAGI

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आज अपने जन्मदिन पर मन उदास क्यों है,
        
                                                    
                            
जो चला गया छोड़कर, उसकी तलाश क्यों है।
आज तो खुशियों का दिन है, फिर आँखें नम क्यों हैं,
दिल में दबी हुई यादें आज इतनी संग क्यों हैं।
उम्र का एक और पड़ाव पार कर लिया मैंने,
न जाने कितने ख्वाबों को दिल में उतार लिया मैंने।
क्या पाया, क्या खोया, इसी सोच में हूँ आज,
खुद से ही कर रही हूँ कुछ अनकहे सवाल आज।
जिसे भूल जाने की कसमें खाई थीं कभी,
उसी की याद दिल में बार-बार आती क्यों है अभी।
सब कुछ तो है पास मेरे, फिर भी एक कमी-सी है,
चेहरे पर मुस्कान है, पर आँखों में नमी-सी है।
शायद जन्मदिन केवल उम्र बढ़ने का नाम नहीं,
यह उन अधूरी कहानियों को याद करने का भी दिन है,
जो दिल में रह गईं, मगर ज़िंदगी में पूरी न हो सकीं…
17 घंटे पहले
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