एक दिन की खुशी…
कल रात मासूम चाँद भी शिकार हुआ,
तेज़ हवाओं का, गरजते बादलों का।
लगातार बरसती बारिश ने,
घर से निकलने ही न दिया।
ऐसी भी क्या जलन थी बेचारे से,
एक दिन मिला था खुशी का,
वो भी जीने न दिया।
जिस रात को चाँदनी में ढलना था,
वो रात बादलों में खो गई।
एक छोटी-सी खुशी की चाह थी,
वो भी बारिश की भेंट चढ़ गई।