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वो भी बारिश की भेंट चढ़ गई।

ANURADHA TYAGI

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एक दिन की खुशी…
        
                                                    
                            
कल रात मासूम चाँद भी शिकार हुआ,
तेज़ हवाओं का, गरजते बादलों का।
लगातार बरसती बारिश ने,
घर से निकलने ही न दिया।
ऐसी भी क्या जलन थी बेचारे से,
एक दिन मिला था खुशी का,
वो भी जीने न दिया।
जिस रात को चाँदनी में ढलना था,
वो रात बादलों में खो गई।
एक छोटी-सी खुशी की चाह थी,
वो भी बारिश की भेंट चढ़ गई।
11 घंटे पहले
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