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वो भी बारिश की भेंट चढ़ गई।

                
                                                         
                            एक दिन की खुशी…
                                                                 
                            
कल रात मासूम चाँद भी शिकार हुआ,
तेज़ हवाओं का, गरजते बादलों का।
लगातार बरसती बारिश ने,
घर से निकलने ही न दिया।
ऐसी भी क्या जलन थी बेचारे से,
एक दिन मिला था खुशी का,
वो भी जीने न दिया।
जिस रात को चाँदनी में ढलना था,
वो रात बादलों में खो गई।
एक छोटी-सी खुशी की चाह थी,
वो भी बारिश की भेंट चढ़ गई।
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10 घंटे पहले

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