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ज़रूरत-ए-हक़

Anshika Raina

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हमें आज के ज़माने में भी किरदार-पेशी की क्या ज़रूरत है भला...
        
                                                    
                            
हमने तो भरी जवानी में भी अपने जिस्म को उसकी ही ज़रूरत से महरूम रखा...
क्योंकि उस पर हक़ उनका था जिन्होंने हमारी ज़ुल्फ़ों को तक नहीं छुआ था...
19 घंटे पहले
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