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ताज बदल दो

Ankit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तख्त बदल दो
        
                                                    
                            
ताज बदल दो
कल नहीं आज बदल दो
उठो,सारा समाज बदल दो
जगो, जगाओ जग को
करो प्रशस्त मग को
सिंह सा दहाड़ दो
चीर दो, फाड़ दो
काट सारे झाड़ झंखाड़ दो
तोड़ पठार, पहाड़ दो
उठो, हुंकार दो
उठो, ललकार दो
उठा तोप तलवार लो
कर शत्रु पर वार दो
स्वदेश को प्यार दो
स्वदेश से प्यार लो।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
एक घंटा पहले
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