तख्त बदल दो
ताज बदल दो
कल नहीं आज बदल दो
उठो,सारा समाज बदल दो
जगो, जगाओ जग को
करो प्रशस्त मग को
सिंह सा दहाड़ दो
चीर दो, फाड़ दो
काट सारे झाड़ झंखाड़ दो
तोड़ पठार, पहाड़ दो
उठो, हुंकार दो
उठो, ललकार दो
उठा तोप तलवार लो
कर शत्रु पर वार दो
स्वदेश को प्यार दो
स्वदेश से प्यार लो।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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