कहीं धूप, कहीं छाया
कभी कोई मुझे रुलाया
कभी कोई मुझे हंसाया
है जीवन में मोह माया
है स्वस्थ मन और काया
तो स्वर्ग धरा पर आया।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'